जय यमाग्रज शनि

जय यमाग्रज शनि, 
अनुशासन कीर्ति के धनी, 
तुम हो भ्राता सह महादंडी, 
नहीं बख़्शते विलासी और घमंडी। 

तुम्हारे चरणों में है ऐश्वर्य, 
तुम पुलिस के कराते हो कार्य, 
तुमसा दंडी केवल यमराज, 
प्रभु कृपा बरसाओ आज। 

तेल की बाती लोहे का दीपक, 
आरती उतारे जन श्रद्धापूर्वक, 
चढ़ाये काले रंग के अनाज, 
हमें तुम पर है नाज़। 

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