हो जाऊं मैं भूत तुम्हारो
हे शंकर भगवान्
मैं करूं आपका अथाह सम्मान,
मुझे इतना प्रिय हो अपना दुखता जीवन,
की मैं उठा लूं आपके शत्रुओं के ख़िलाफ़ तीर-कमान।।
हे शिव भोले भंडारी,
आप सा नहीं कोई भोला महादेव,
नंदी भृंगी भूत सर्प एवामेव,
मां जगदम्बा कार्तिक गणेश आपको रहते सेव।।
इस भौतिक जगत से मुझको उबारो,
कर्म आठों पहर, केवल जप तुम्हारो,
भोलेनाथ भोलेनाथ मैं दूं हर वक्त पुकारो,
हो जाऊं भक्त भले ही मैं भूत तुम्हारो।।
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