संकटमोचन को समर्पित भजन
तू ही मंगलशमनकर्ता,
तू ही तोड़े अभिमान,
तू ही संस्थापक धर्म का,
तू पवनपुत्र हनुमान।।
तेरे द्वार पर भीड़ लगी,
राम-राम शब्द से जग जगी,
दुनिया पराई न कभी सगी,
श्री राम में सुरति लगी।।
तू ही मंगलशमनकर्ता,
तू ही तोड़े अभिमान,
तू ही संस्थापक धर्म का,
तू पवनपुत्र हनुमान।।
तुमसे शुरु हो मंगल कार्य,
तू ही चमकाते हर सदी,
राक्षसों का दमनक, ब्राह्मणों का संरक्षक,
तू करा नेकी, छुड़ा बदी।।
तू ही मंगलशमनकर्ता,
तू ही तोड़े अभिमान,
तू ही संस्थापक धर्म का,
तू पवनपुत्र हनुमान।।
मुझ दुःखी-बेसहारा का,
तू तैयार कर दे ऐसा पताका
मुझ पेड़ की फैलें सर्वाधिक शाखा,
बुलंद कर ऐसा पताका।।
तू ही मंगलशमनकर्ता,
तू ही तोड़े अभिमान,
तू ही संस्थापक धर्म का,
तू पवनपुत्र हनुमान।।
।। जो बांटे दौलत-शोहरत, उसे मिले सम्मान ।।
अरु जो सेवै मानव जाति, उसे मिलें हनुमान ।।
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