शंकर भगवान की जय
अब जब सब ठिठुर रहे,
काहे सहें रहे घमंड।
भोले शंकर भोले भण्डारी
दे दिए सबजन को दण्ड।।
ऐसी फैली महाप्रलय,
कॉरॉना बीमारी प्रचण्ड।
उस पर भोले बाबा ने,
उत्तराखंड से भेजी ठंड।।
अर्थवयवस्था हुई अव्यवस्था,
कैसा कैसा आर्थिक दण्ड।
संयुक्त राष्ट्र भी होता कंगाल,
बह गया सारा फंड।
टूट रहा ५६ ईंच वक्ष
कैसी हो गई झंड!
कुदरत की बदले की भावना
झेलेगी मनुष्यों को प्राण दण्ड।
ॐ नमः शिवाय।।
ॐ नमः शिवाय।।
ॐ नमः शिवाय।।
Comments
Post a Comment