हरि भजन
हे मेरे प्यारे हरि
ये नश्वर शरीर तुम्हरी
पाप को तुम नाशो हरि
बुराई से पहले जपूं हरि।
विश्व कल्याण को स्मरण हुए
अछूत जैसे को गले लगे
तुम मेरे सबसे सगे
नष्ट करो जो पाप हुए।
दुनिया में जो हरि रटा
उसपर से तो दुख हटा
बल बढ़ा और छल घटा
कपट धूर्तता का राज छटा।
जो तुमको पूजे आज
पूर्ण होवे सारे काज
निर्धन बनें राजाधिराज
कमज़ोर सेना के जीत जाएं जहाज।
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